गज़ल, दिल की बातें, शायरी

बेतकदीर हूँ बरसों से

ठहरो आंखों में तुम्हारी तस्वीर बना लूं मैं
बेतकदीर हूँ बरसों से तकदीर बना लूं मैं
कोई छीन नहीं पाए मुझसे तेरी चाहत
तुझको ऐसे हाथों की लकीर बना लूं मैं
जब तक है जाँ में जाँ तू मेरी ही रहना
आ जा तुझको अपनी जागीर बना लूँ मैं
चाहूँ तुझको शीरी फरहाद से भी ज्यादा
रांझा बनकर तुझको अब हीर बना लूँ मैं
ठहरो आंखों में तुम्हारी तस्वीर बना लूं मैं
बेतकदीर हूँ बरसों से तकदीर बना लूं मैं