कुछ हसीनों की आदत बुरी है

ना मोहब्बत ना चाहत बुरी है
कुछ हसीनों की आदत बुरी है
दिल टूटा तब जान पाए
पत्थरों की इबादत बुरी है
कोई दिल को जरा समझा दे
अपनों से यूँ बगावत बुरी है
रूठना इनका वाजिब है लेकिन
बेवजह की शिकायत बुरी है
ना बरी करते हैं ना सजा दें
हुस्न की ये अदालत बुरी है
ना मोहब्बत ना चाहत बुरी है
कुछ हसीनों की आदत बुरी है