हम तो तेरे दीवाने हैं

माना कि दुनियादारी से अन्जाने हैं
बुरे सही पर हम तो तेरे दीवाने हैं
मुबारक हो तुमको साथ अपनों का
हमारा क्या है हम तो इक बेगाने हैं
###
ना हमें महफिल ना तनहाई का डर है
ना किसी दर्द ना तो रुशवाई का डर है
जब से तुम आए हो मेरी जिन्दगी में
ऐ यार मेरे सिर्फ तेरी जुदाई का डर है
###
ऐसा नहीं कि यहां पर कोई हमें जानता नहीं
बस वक्त बुरा है इसलिए कोई पहचानता नहीं
###
तनहाई में भी यादों की महफिल सजाए रहते हैं
रोते हैं लेकिन पलकों में अश्क दबाए रहते हैं
हम जानते हैं तुम लौटकर अब आओगे नहीं
फिर भी हम तेरी राहों में नजरें बिछाए रहते हैं
###
अक्सर हमारा दिल और हम लडते झगडते हैं
मिलते ही क्यों है लोग जब मिलकर बिछडते हैं
चुनवाये जाते हैं क्यों आखिर आशिक दीवारों में
क्यों बन के ख्वाबों के महल गिरते उजडते हैं