क्यों हो गया तू बेवफा

तू दूर जब से हो गया
लगे सूना सूना ये जहाँ
यूं अधूरा सा हूँ तेरे बिन
हो चाँद बिन जैसे आसमाँ
तेरे साथ थे क्या बात थी
हर इक खुशी जैसे साथ थी
बडे अच्छे दिन वो लगते थे
संग सोते थे संग जगते थे
मुझे याद है ऐ हमनशीं
जन्नत सी थी तेरी गली
तेरी गली में आ जा के
खिल सी गई थी जिन्दगी
मुझे मार के न यूं मुस्कुरा
बस यार मुझको ये बता
गैरों की बाहों में झूल के
कैसे खुश है तू सब भूल के
ऐ संगदिल जान-ए-वफा
दो दिन में ये क्या हो गया
क्यों हो गया तू बेवफा..
क्यों हो गया तू बेवफा !hj