और इन्तजार हो न पाएगा

इक बार हो गया है हर बार हो न पाएगा
यूँ रोज रोज हमसे इन्तजार हो न पाएगा
एकमुश्त दे सको हमें प्यार गर तो बोलो
किश्तों में यार हमसे ये प्यार हो न पाएगा
माना कि जहां भर को है तेरी तलब लेकिन
मुझ जैसा कोई तेरा तलबगार हो न पाएगा
रुख से जरा दुपट्टा सरका दो जानेजाना
परदे में पूरे चाँद का दीदार हो न पाएगा
ऐ ‘”राज” हमें दे दो कुछ और सजा बेशक
पर दूर तुमसे रहना सरकार हो न पाएगा
इक बार हो गया है हर बार हो न पाएगा
यूँ रोज रोज हमसे इन्तजार हो न पाएगा