सच्ची मोहब्बत : सूरत या सीरत


जैसे ही फोन बजा साहिबा ने तुरंत फोन उठा लिया मानो वह फोन पर ही नजरें गडाए बैठी थी कि कब रोहन का फोन आए। फोन उठाते ही खुशी के मारे बौखलायी साहिबा ने जैसे ही बोला हैलो… उधर से आवाज आयी , साहिबा मैं तुमसे शादी नहीं कर सकता। साहिबा को तो जैसे करेंट सा लग गया वह कांपते होठों से बोली , “पर हुआ क्या ,क्यों नहीं कर सकते शादी, शादी में तो बस दो दिन बाकी है और अब तुम…” उधर से आवाज आयी क्योंकि मेरे घर वाले नहीं चाहते मैं किसी जली हुई लडकी से शादी करूँ और फिर मेरे दोस्त क्या सोचेंगे मैं इतना हैंडसम और मेरी बीवी… खैर मैं ये शादी नहीं कर सकता बस। दुबारा मुझे फोन मत करना और अपने घर वालों को भी समझा देना। इतना कहकर रोहन ने फोन काट दिया।
दोस्तों अब आप सोच रहे होंगे कि रोहन ने ऐसा क्यों कहा और साहिबा कैसे जल गई या फिर पहले से जली हुई थी तो रोहन ने शादी के लिए पहले हां क्यों बोला था और अब इनकार क्यों कर रहा है ? आइए जानते हैं शुरू से……

ये एक छोटी सी मगर सच्ची कहानी है जो हम आपको बताने जा रहे हैं। दरअसल, तीन दोस्त थे साहिल , रोहन और साहिबा।साहिल थोडा साँवला मगर दिल का बहुत अच्छा था जिसकी वजह से पूरे गांव में हर मुंह से उसके लिए बस तारीफ ही निकलती थी लेकिन साथ ही साथ गरीब भी था ।
वहीं रोहन गोरा और काफी हैंडसम था बडे घर का इकलौता लडका था। उसके शौक भी बडे बडे थे और जैसा कि अक्सर होता है बडे लोगों में , उसके अपने हैंडसम होने और दौलतमंद होने का घमंड भी था। साथ ही साथ ज्यादातर काम वह अपने मतलब के लिए ही करता था।
वहीं साहिबा भी बेहद खूबसूरत थी। उसकी खूबसूरती के चर्चे अक्सर कालेज में और गांव के लडकों के बीच होते रहते थे । बहुत सारे लडके साहिबा के पीछे पडे रहते थे लेकिन वह किसी को भी भाव नहीं देती थी।
रोहन,साहिल और साहिबा तीनों एक ही क्लास में पढते थे इसलिए तीनों काफी अच्छे दोस्त थे। साहिबा को साहिल का साथ इसलिए पसंद था क्योंकि वह बहुत ही सीधा सादा और ईमानदार स्वाभाव का था और रोहन के साथ इसलिए रहती थी क्योंकि वह दिखने में काफी हैंडसम और बडे घर का था।

साथ साथ रहते रहते साहिल और रोहन दोनों को ही साहिबा से प्यार हो गया था पर किसी में हिम्मत नहीं थी कि साहिबा से जाकर अपने दिल की बात बता सके।
अब रोहन और साहिल दोनों ने फैसला किया कि दोनों ही अपने अपने प्यार का इजहार करेंगे लेकिन साहिबा जिसको भी चुनेगी वह उसी की होगी। साहिबा के फैसले के बाद कोई बुरा नहीं मानेगा और हमारे बीच जो दोस्ती है वह बरकरार रहेगी।

साहिल को अपनी ईमानदारी और अच्छाई पर भरोसा था तो रोहन को अपने अच्छे चेहरे और अमीरी पर । अब दिक्कत यह थी कि साहिबा से अपने दिल की बात पहले कौन कहे। दोनों ही जल्द से जल्द अपने प्यार का इजहार करना चाहते थे ताकि कहीं देर न हो जाए।
फिर दोनों ने फैसला किया कि हम साथ में प्रपोज करेंगे साहिबा ने जिसको जवाब दिया वह उसी की होगी और अगर दोनों को रिजेक्ट किया तो भी हम दोस्त बने रहेंगे। अब हिम्मत तो थी नहीं किसी में कि सामने से बोल सकें तो दोनों ने कागज पर अपने अपने दिल की बात लिखी और क्लास से निकलते वक्त साहिबा के बैग में रख दिया ताकि शाम तक साहिबा तक उनकी बातें पहुंच जाएं।
रात हुई और साहिबा खाना खाकर पढने के लिए जैसे ही बैठी और बैग खोला तो दो कागज मिल गए । दोनों को उसने पढा और फिर एक गहरी सोच में डूब गई। उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे। दोनों ने एक साथ प्रपोज किया है और फैसला उस पर छोडा है। अब दोनों ही उसके अच्छे दोस्त हैं तो कैसे फैसला कर लें।

इधर साहिल और रोहन दोनों को ही नींद नहीं आ रही थी । मन में अजीब सी घबराहट थी कि कल पता नहीं क्या होगा। दोनों ही रात भर करवटें बदलते रहे। यहां साहिबा भी अजीब उलझन में थी। फिलहाल किसी तरह रात बीती तो साहिबा ने फैसला कर ही लिया। उसने फैसला किया कि उसका भविष्य रोहन के साथ ज्यादा सुरक्षित है और वह उसे कुछ ज्यादा पसंद भी करती है। बडे घर का भी है आर्थिक रूप से भी कोई समस्या नहीं होगी और साहिबा की खूबसूरती के साथ साथ रोहन की सुन्दरता मैच भी करती है।
साहिबा ने रोहन को फोन किया पर कुछ बोल नहीं रही थी। रोहन ने पूछा , ” क्या हुआ साहिबा गुस्सा हो क्या .. दरअसल वो क्या हुआ कि.. मैं बहुत दिनों से तुमसे.. ।” रोहन ने इतना ही कहा था कि साहिबा भी बोल पडी . .. ” तो कागज में लिखकर कहने की क्या जरूरत थी सामने से बोल देते या फोन में कह देते। “
रोहन बोला, ” अब क्या करूँ हिम्मत नहीं थी।”

” और ये साहिल ..साहिल ने भी प्रपोज किया है तुम दोनों मिलकर कहीं मजाक तो नहीं बना रहे हो मेरा। देखो मेरे साथ ऐसा मजाक मत करना वरना…” साहिबा ने मजाकिया अंदाज में कहा। रोहन मुस्कुराते हुए बोला , ” अरे नहीं.. नहीं वो हम दोनों तुमसे प्यार करते हैं पर फैसला तुम्हारे ऊपर है तुम जिसको चाहो वही तुम्हारा होगा बाकी हमारी दोस्ती पहले जैसी ही बनी रहेगी .. पक्का प्रोमिस।”
साहिबा बिना हिचकिचाए बोल पडी .. ” मुझे तुम पसंद हो।” इतना कहकर शरमाते हुए उसने फोन काट दिया। अब रोहन की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। उसने तुरंत साहिल को फोन किया और सारी बात बता दी। साहिल बेचारे का मुंह लटक गया क्योंकि आज फिर मोहब्बत में दौलत और खूबसूरती जीत गई थी।

खैर बात आगे बढती गई और साहिबा तथा रोहन का प्यार परवान चढ़ने लगा। साहिल ने भी अपने आपको सम्भाल लिया और एक दोस्त की तरह फिर से रहने लगा। दोनों के प्यार की बात दोनों के घर वालों तक  पहुंची और वे भी राजी हो गए और ग्रेजुएशन कम्पलीट होते ही दोनों की शादी के लिए भी सब सहमत हो गए।
साल बीता और तीनों दोस्तों ने ग्रेजुएशन कम्पलीट कर लिया। साहिबा और रोहन की बेचैनियां बढती जा रही थी कि कब उनकी शादी हो। कुछ दिन बाद दोनों की शादी की तारीख भी तय हो गई। अब जैसे जैसे शादी की तारीख नजदीक आ रही थी वैसे वैसे साहिबा और रोहन की बेताबियाँ बढती जा रही थी। यहां तक कि शादी से पहले ही दोनों काफी नजदीक आ गए थे। यह सब साहिल को अच्छा नहीं लग रहा था लेकिन वह कुछ बोल भी नहीं सकता था।
सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था । समय बीतता गया और अब जब शादी में सिर्फ 15 दिन शेष थे तो एक अनहोनी घटना हो गई जिसने सब कुछ तहस नहस कर दिया।
शाम का वक्त था साहिबा खाना बना रही थी और रोहन तथा साहिल बाहर बैठकर शादी के तैयारियों के बारे में साहिबा के घर वालों के साथ विचार विमर्श कर रहे थे कि शादी में कितने लोग आएंगे, क्या क्या व्यवस्था करनी है और कितना खर्च आएगा वगैरह वगैरह.. तभी अचानक साहिबा के चीखने की आवाज आई …”अरे पापा बचाओ आग लग गई।”
इतना कहते वह बाहर की ओर भागी और देखकर सबके होश ही उड गए। दरअसल उसके कपडों में एक तरफ आग पकड चुकी थी । रोहन के रोंगटे खडे हो गए थे वह बस खडा होकर देख रहा था और सोच रहा था कि वह क्या करे और साथ ही साथ वह डर भी रहा था कि साहिबा की आग बुझाने में कहीं उसे न आग पकड़ ले ।
रोहन यह सब सोच ही रहा था कि साहिल ने तुरन्त अपनी शर्ट उतारी और साहिबा की आग बुझाने लगा । काफी कोशिश के बाद फिलहाल किसी तरह आग बुझी मगर साहिल के भी हाथ जल गए और साहिबा भी एक तरफ काफी हद तक झुलस गई थी। जल्दी जल्दी में लोग उसे अस्पताल ले गए और ट्रीटमैंट शुरू हो गया।
रोहन को अन्दाजा हो गया था कि साहिबा काफी जल चुकी है वह  कुछ देर अस्पताल में रुका फिर घर चला गया जबकि साहिल वहां से एक पल के लिए भी नहीं हटा।प्राथमिक इलाज होने के बाद डाक्टरों ने कन्फर्म किया कि साहिबा अब खतरे से बाहर है लेकिन उसका आधा चेहरा काफी झुलस गया है जिसे रिकवर होने में वक्त लग सकता है।

अस्पताल में ही धीरे धीरे तेरह दिन बीत गए मगर हैरानी की बात यह थी कि रोहन ने एक बार भी साहिबा से सम्पर्क नहीं किया। अब शादी में दो दिन ही शेष थे। बीते तेरह दिनों में  कई बार साहिबा ने रोहन से फोन पर बात करने की कोशिश की पर रोहन हर बार फोन काट देता।

फिर अचानक रोहन का फोन आता है और कहता है …”सौरी साहिबा मै तुमसे शादी नहीं कर सकता क्योंकि मेरे घर वाले कह रहे हैं कि वो जली हुई लडकी से शादी नहीं करना चाहते।” साहिबा के सामने तो जैसे अंधेरा छा गया उसने कहा कि घर वालों की छोडो तुम तो मुझसे प्यार करते हो तुम बताओ तुम क्या चाहते हो ?
क्या इतना खुदगर्ज और कमजोर था तुम्हारा प्यार कि बस एक ही घटना से सब खतम । इसके बाद रोहन ने जो जवाब दिया उसे सुनकर साहिबा के पैर तले से जमीन खिसक गई। रोहन ने कहा …” कैसा प्यार यार ? मेरी भी कुछ ख्वाहिशें हैं, शादी बार बार नहीं होती, मैं हमेशा चाहता था कि मेरी पत्नी सबसे सुन्दर हो।

आखिर शादी ब्याह एक दो दिन की बात तो है नहीं पूरी जिन्दगी का सवाल है । मैं तुम्हारी खूबसूरती पर फिदा था जो अब तुममें नहीं है। तुम्हारा आधा चेहरा जल गया है अब तुमसे शादी करूंगा तो मेरे दोस्त क्या सोचेंगे ? देखो साहिबा मुझे माफ करना मैं तुमसे शादी नहीं कर सकता , दुबारा मुझे फोन मत करना।” इतना कहकर रोहन ने फोन काट दिया।
साहिबा ने सारी बात अपने घर वालों को बताई । रोहन का फैसला सुनकर साहिबा के साथ साथ सारे घर वाले परेशान थे क्योंकि शादी में सिर्फ दो दिन ही बचे थे । साहिबा के पापा ने भी रोहन के घरवालों से बात करने की कोशिश की लेकिन वहां से भी निराशा ही हाथ लगी। रिश्तेदारों को क्या मुंह दिखाएंगे यही सोच सोच के साहिबा के पापा की आँखों से आँसू टपक रहे थे।

तभी अस्पताल में साहिल पहुंचा तो देखा सबका चेहरा लटका हुआ है सब की आंखों में पानी भरा हुआ है। वह कुछ समझ नहीं पा रहा था । फिर उसने पूछा कि क्या बात है सब लोग इतने परेशान क्यों हैं। साहिबा ने एक एक करके सारी बात बता दी। साहिल कुछ देर खामोश रहा और फिर उठकर बाहर चला गया और रोहन के पास फोन किया तो रोहन ने गुस्से में कहा, “यार तुम लोग समझते क्यों नहीं मैं अब साहिबा से शादी नहीं कर सकता ,मुझे फोन मत करो प्लीज।” साहिल बोला , ” यार ये साहिबा की जिन्दगी का सवाल है आखिर हम अच्छे दोस्त हैं एक दूसरे के बुरे वक्त में साथ छोड देंगे तो कैसे चलेगा ।”अब रोहन और भी गुस्सा हो गया और चिल्ला कर बोला ,” मुझे नहीं करनी ये शादी बस, इतनी ही फिक्र है तुमको उसकी तो तुम ही कर लो ना ।”
इतना कहकर उसने फोन काट दिया। साहिल साहिबा के पास आया ,आराम से बैठा और बोला , ” साहिबा मैं हैंडसम तो नहीं हूँ न ही रोहन की तरह अमीर हूँ पर अगर तुम्हें ऐतराज़ न हो तो मैं तुमसे शादी करना चाहता हूँ और उसी तारीख पर जिस तारीख पर तुम्हारी और रोहन की शादी होने वाली थी।

साहिबा ने बडे आश्चर्य से साहिल की और देखा और कुछ बोलने वाली ही थी कि साहिल फिर बोल पडा , “ये मत सोचना कि मैं तुमपर तरस खा कर ऐसा कह रहा हूं बल्कि इसलिए कह रहा हूं क्योंकि मैं तुमसे सच्चे दिल से प्यार करता हूं। तुम्हारा चेहरा जल गया है तो क्या हुआ तुम मेरे लिए अब भी उतनी ही खूबसूरत हो जितनी पहले थी।”
साहिल की बातें सुनकर साहिबा की आँखों से आँसू गिरने लगे शायद आज उसे सच्चे प्यार में और झूठे प्यार में फर्क साफ साफ दिखाई देने लगा था। उसे समझ में आ रहा था कि उसने रोहन को चुनकर कितनी बडी गलती की थी।

दोस्तों,
हमने अक्सर लडके और लडकियों को देखा है जो अपने जीवनसाथी का चुनाव करते समय सिर्फ बाहरी सुन्दरता को ही तवज्जो देते हैं। वे यह बिल्कुल भी जानने का प्रयास नहीं करते हैं कि उसका स्वभाव कैसा है या उसका चरित्र कैसा है ।
किसी के खूबसूरत चेहरे से प्यार मत कीजिए क्योंकि चेहरे की खूबसूरती तो एक दिन खत्म हो जाएगी। यदि प्यार करना है तो किसी के खूबसूरत दिल से कीजिए क्योंकि दिल की खूबसूरती कभी भी खत्म नहीं होती।
जिस इंसान का दिल खूबसूरत है वह अगले सौ सालों के बाद भी खूबरसूरत ही रहेगा।चेहरे का क्या है वह आज खूबसूरत है तो कल बदसूरत भी हो सकता है।याद रखिए आपके खूबसूरत चेहरे से प्यार करने वाला आपको तभी तक प्यार करेगा जब तक आपके पास खूबसूरत चेहरा हैं।
आपके चेहरे की खूबसूरती खत्म होते ही उसका प्यार भी खत्म हो जाएगा। परन्तु जो इंसान आपके सुन्दर दिल और आपके अच्छे व्यवहार से प्यार करता है उसके प्यार का कभी भी अन्त नहीं होगा।
किसी भी इंसान में गुण भी उच्च कोटि के हों और वह सुन्दर भी हो यह बहुत ही कम देखने को मिलता है वे लोग जो मन या दिल के सुन्दर होते हैं वे आसानी से हर दिल में जगह बना लेते हैं और बडी आसानी से हर अच्छी बुरी परिस्थितियों में अपने आपको एडजस्ट कर पाने में सक्षम होते हैं।

खूबसूरत होना या न होना यह हमारे वश में नहीं होता बल्कि यह तो ईश्वर की कृपा और कुछ हद तक हमारे माता पिता की सुन्दरता पर निर्भर करता है जबकि अपने मन को सुन्दर रखना या अपने व्यवहार को अच्छा रखना हमारे अपने वश में होता है।
अपने मन को साफ रखकर, गन्दी बातों और बुराइयों से अपने आपको दूर रखकर तथा मीठी बोली बोलकर हम अपने आपको दूसरों से बेहतर बना सकते हैं ।
कोशिश करने से चेहरा खूबसूरत बने न बने लेकिन अच्छी बातों, अच्छे मन,अच्छे दिल,अच्छी सोच और अच्छे व्यवहार से हम जिन्दगी को खूबसूरत जरूर बना सकते हैं।

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