इक साधू बंजारा- राम रहीम

मैं था इक साधू बंजारा
मुझे हुस्न ने कुछ ऐसा मारा
विख्यात से मैं कुख्यात हुआ
बरबाद हुआ मैं बेचारा
सब मेरे बस में थे और खुद को मैं कहता था ईश्वर
लेकिन जो आँधी आई तो न बचा पाया अपना ही घर
सच्चाई की चिंगारी ने
पहले मेरा ही घर जारा
मैं था इक साधू बंजारा…
सज्जन बनकर मैने दिखाया ठेंगा यूँ सज्जनता को
उल्लू बनाकर लूटा बहुत इस भोली भाली जनता को
लेकिन जब होश आया सबको
सबने मिलकर मुझे दे मारा
मैं था इक साधू बंजारा…
जाने कितनी गाली मिली और ताने सुबह शाम मिले
पाखंडी दुष्कर्मी पापी रब जाने क्या क्या नाम मिले
फिर भी मैं अब तक जिन्दा हूँ
बेशर्मी आशिक आवारा
मैं था इक साधू बंजारा….
इंटरनेट और अदालत ने कुछ इस तरह रणनीति रची
लाखों भक्तों के होते हुए मेरे साथ सिर्फ हनीप्रीत बची
हनीप्रीत और मेरे रिश्ते
पर भी तो हँसा ये जग सारा
मैं था इक साधू बंजारा….
मैं था इक साधू बंजारा
मुझे हुस्न ने कुछ ऐसा मारा
कुख्यात हुआ सारी दुनिया में
बरबाद हुआ मैं बेचारा