मेरी चाहत मेरी आरजू

मैं कुछ इस तरह से तेरे खयालों
में खोना चाहता हूँ
मन के धागों में तेरे नाम के मोती
पिरोना चाहता हूँ
मुझे चाहत नहीं है किसी अमृत किसी
सागर किसी बरसात की
मैं तेरे लबों से अपने लबों को
भिगोना चाहता हूँ
अब इन्तजार नहीं है मुझको किसी
भी काली रात का
क्योंकि मैं तो तेरी जुल्फों की रानाई
में सोना चाहता हूँ
मुझे जरूरत क्या है अब आलीशान
बडे मकानों की
मैं तेरे बडे से दिल में इक छोटा
सा कोना चाहता हूँ
मैं कुछ इस तरह से तेरे खयालों
में खोना चाहता हूँ
मन के धागों में तेरे नाम के मोती
पिरोना चाहता हूँ।